बुरहानपुर। एनटीसी (नेशनल टेक्सटाइल कॉर्पोरेशन) के अधीन संचालित लालबाग स्थित ताप्ती मिल के श्रमिकों का आक्रोश शुक्रवार को फूट पड़ा। लंबे समय से रूके वेतन और बंद उत्पादन से परेशान मजदूरों ने मिल गेट के सामने टेंट लगाकर धरना शुरू कर दिया। श्रमिकों का कहना है कि सरकार और प्रबंधन दोनों की उदासीनता से उनकी आर्थिक हालत बद से बदतर हो चुकी है।
17 महीने से आधा वेतन, 8 महीने का पूरा वेतन बकाया
धरना दे रहे मजदूरों के अनुसार मिल में नवंबर 2004 से जून 2005 तक आठ माह का वेतन बकाया है। इतना ही नहीं, कोरोना के बाद जून 2023 से अब तक 17 माह का आधा वेतन भी अटका हुआ है। वेतन न मिलने से श्रमिकों के परिवारों का गुजर-बसर मुश्किल हो गया है। मिल बंद है, लेकिन कागजों में चालू दिखा रहे हैं। हमारे पेट पर लात मारकर फाइलों में प्रगति लिखी जा रही है — एक श्रमिक ने आक्रोश जताया।
वेतन, बोनस और स्थायी नियुक्ति की मुख्य मांगें
धरना स्थल पर श्रमिकों ने साफ कहा कि जब तक रूका हुआ वेतन नहीं मिलेगा, बढ़ा हुआ मानदेय और बोनस जारी नहीं होगा, और मिल फिर से चालू नहीं होगी, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा। साथ ही उन्होंने स्थायी नियुक्ति और नया समझौता करने की मांग भी रखी।
सांसद ने उठाया था मामला, सचिव ने दिया था वादा
श्रमिकों की समस्या को लेकर सांसद ज्ञानेश्वर पाटील ने दिल्ली में वस्त्र मंत्रालय की सचिव नीलम शमी राव से मुलाकात की थी। सचिव ने अगस्त में वेतन जारी करने का आश्वासन दिया था, लेकिन नवंबर तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब श्रमिकों ने कहा है कि सिर्फ आश्वासन से पेट नहीं भरता, हमें हक चाहिए।
साढ़े चार साल से हालात खराब
भारतीय मिल परिषद के अध्यक्ष विजय कार्ले ने बताया कि पिछले साढ़े चार सालों से श्रमिकों की आर्थिक स्थिति बेहद खराब है। उन्होंने कहा मजदूरों का 10 माह का वेतन और 3 साल का बोनस बकाया है। हर साल 85 रुपये मजदूरी बढ़ाने का नियम है, लेकिन इस बार टेक्सटाइल सेक्टर को बाहर कर दिया गया — यह अन्याय है। धरने में भारतीय मिल मजदूर संघ, ताप्ती मिल श्रमिक संघ, भारतीय किसान मिल मजदूर परिषद और कर्मचारी यूनियन के सदस्य शामिल रहे।
पहले भी मिले थे नेता, पर नहीं बदले हालात
इससे पहले भी सांसद ज्ञानेश्वर पाटील और विधायक अर्चना चिटनिस ने ताप्ती मिल पहुंचकर प्रबंधन से चर्चा की थी। कई बार श्रमिकों को आंशिक भुगतान कराया गया, लेकिन पूरा वेतन और बोनस अब तक नहीं मिला। पूर्व विधायक ठाकुर सुरेंद्र सिंह ने भी हाल ही में मिल में जाकर विरोध जताया था और लिखित आश्वासन के बाद लौटे थे। लेकिन आश्वासन कागज़ पर ही रह गया, हकीकत में कुछ नहीं बदला।
भूख, बेरोजगारी और टूटी उम्मीदें
लंबे समय से वेतन न मिलने के कारण श्रमिकों के घरों में आर्थिक संकट गहराता जा रहा है। कई श्रमिक अब दैनिक मजदूरी या छोटे कामों में लग चुके हैं। धरने पर बैठे एक वरिष्ठ मजदूर ने कहा हमने इस मिल को अपने खून-पसीने से चलाया है, आज वही मिल हमें भुला चुकी है।
अब होगा निर्णायक आंदोलन
श्रमिक संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो मिल गेट पर अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा अब या तो हमारा वेतन मिलेगा, या हम सब सड़कों पर उतरेंगे।