बुरहानपुर। एआईसीसी की राष्ट्रीय सचिव एवं मध्यप्रदेश सह प्रभारी उषा नायडू के बुरहानपुर दौरे के दौरान कांग्रेस संगठन की अंदरूनी कलह खुलकर सतह पर आ गई। संगठनात्मक मजबूती की मंशा से बुलाई गई बैठक एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) के श्रेय को लेकर तीखी बहस में बदल गई। शहर कांग्रेस अध्यक्ष रिंकू टाक द्वारा एसआईआर का श्रेय लेने की कोशिश पर संगठन के ही कई नेता भड़क उठे और सह प्रभारी के सामने ही खुलकर विरोध दर्ज कराया।
बैठक में मौजूद कांग्रेस नेताओं ने साफ कहा कि एसआईआर की सफलता में नगर कांग्रेस कमेटी का कोई सहयोग नहीं रहा। नेताओं का कहना था कि एसआईआर को सफल बनाने में असली भूमिका शाही जामा मस्जिद के पेश इमाम इकरामउल्ला हजरत और स्थानीय युवाओं की रही। कई वरिष्ठ नेताओं ने इस बात का मौन समर्थन कर संगठन की अंदरूनी सच्चाई उजागर कर दी।
युवाओं और इमाम की अपील से शत-प्रतिशत एसआईआर
दरअसल बुरहानपुर जिले में एसआईआर का काम शत-प्रतिशत पूरा हुआ। नगर के अलग-अलग वार्डों में युवाओं ने खुद आगे बढ़कर शिविर लगाए। वहीं शाही जामा मस्जिद के पेश इमाम इकरामउल्ला हजरत ने लगातार मस्जिद से और सार्वजनिक मंचों से अपील कर आमजन को जागरूक किया। इसका सीधा असर यह हुआ कि मुस्लिम समाज ने बड़ी संख्या में गणना पत्रक भरकर प्रक्रिया को सफल बनाया।
अकील औलिया का तीखा विरोध
शहर अध्यक्ष द्वारा श्रेय लेने की बात पर नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष के प्रतिनिधि अकील औलिया ने खुलकर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि नगर कांग्रेस कमेटी का एसआईआर में कोई सक्रिय सहयोग नहीं रहा। असली मेहनत समाज और युवाओं की है।
2028 में कांग्रेस की सरकार बनाना लक्ष्य —उषा नायडू
बैठक को संबोधित करते हुए सह प्रभारी उषा नायडू ने संगठन को लेकर सख्त तेवर दिखाए। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने उन्हें संगठन मजबूत करने की जिम्मेदारी दी है। काम करने वाले कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ाया जाएगा। 2028 में मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनाना हमारा लक्ष्य है। संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करना होगा। हालांकि बैठक के दौरान मीडिया को बाहर रखा गया। मीडिया के पहुंचने पर सह प्रभारी द्वारा नाराजगी जताना भी चर्चा का विषय बना रहा।
हमने कांग्रेस के लिए काम नहीं किया
राजनीतिक सूत्रों की माने तो बैठक में उस वक्त सन्नाटा छा गया, जब एक कांग्रेस नेता ने खुले मंच से स्वीकार किया कि विधानसभा चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के लिए काम नहीं किया। इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी कहा कि हमने खुलकर एआईएमआईएम का काम किया। लेकिन साथ ही चुनाव हारे पूर्व विधायक ठाकुर सुरेंद्र सिंह के मुंह पर यह भी कहा कि जिन लोगों ने हमारा मार्गदर्शन किया उन्हें तो आपने गुलदस्ते की तरह सजाकर रखा है। हमने तो खुलकर एआईएमआईएम का काम किया था, लेकिन जो लोग कांग्रेस के साथ थे वह तो हमारा भी मार्गदर्शन कर रहे थे। हम मानते हैं कि हमारी गलती से कांग्रेस को हार मिली। इस बयान ने पार्टी की चुनावी रणनीति और अनुशासन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
विरोधाभास की राजनीति: गुलदस्ता और नाराजगी साथ-साथ
चौंकाने वाली स्वीकारोक्ति के बावजूद चुनाव हारे पूर्व विधायक ठाकुर सुरेंद्र सिंह ने उक्त कांग्रेस नेता को गुलदस्ता देकर स्वागत किया। इस दृश्य ने कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति में चल रहे विरोधाभास को और गहरा कर दिया। सह प्रभारी की मौजूदगी में श्रेय की लड़ाई, आपसी आरोप-प्रत्यारोप और चुनावी हार की स्वीकारोक्ति ने कांग्रेस संगठन की जमीनी हकीकत उजागर कर दी है। 2028 के विधानसभा चुनाव की तैयारी का दावा करने वाली कांग्रेस के लिए यह बैठक एकजुटता से ज्यादा अंतर्कलह का आईना बन गई।