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सिविल सर्जन–आरएमओ की गुंडागर्दी कैमरे में कैद: ‘चोर’ बताकर युवक को पिटवाया, वीडियो वायरल…

- फिर भी 3 दिन बाद तक एफआईआर नहीं

बुरहानपुर। जिला अस्पताल अब इलाज का नहीं, डर और दहशत का अड्डा बनता जा रहा है। तीन दिन पहले वायरल हुए एक वीडियो ने अस्पताल प्रशासन की असलियत बेनकाब कर दी है। वीडियो में जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. प्रदीप कुमार मोसेस और आरएमओ डॉ. भूपेंद्र गौर की मौजूदगी में एक युवक की बेरहमी से पिटाई होती दिखाई दे रही है। हैरानी की बात यह है कि वीडियो सबूत होने के बावजूद अब तक किसी पर एफआईआर दर्ज नहीं की गई।

दरअसल पूरा विवाद सीएमएचओ कार्यालय में पदस्थ सहायक ग्रेड-3 कर्मचारी से जुड़ा है। आरोप है कि सिविल सर्जन ने उससे अभद्र व्यवहार किया, धमकाया और दबाव बनाया। जब कर्मचारी ने विरोध किया तो उसके घर तक गुंडे भेजे गए। डरे-सहमे कर्मचारी योगेश गोस्वामी ने अपने परिचित को बुलाया, लेकिन अस्पताल परिसर में उसे पूर्व नियोजित साजिश के तहत ‘चोर’ बताकर पकड़ लिया गया और फिर शुरू हुई लात-घूंसों और डंडों से पिटाई।

युवक बार-बार कहता रहा मैं कुछ गलत करने नहीं आया हूं… लेकिन किसी ने उसकी एक नहीं सुनी। पूरी वारदात कैमरे में कैद हो गई और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

रात में शिकायत, पुलिस ने झाड़ लिया पल्ला

पीड़ित योगेश गोस्वामी ने उसी रात पुलिस को शिकायत दी, लेकिन पुलिस ने यह कहकर हाथ खड़े कर दिए कि यह विभागीय मामला है। जबकि कानून साफ कहता है कि मारपीट और हमला आपराधिक कृत्य है, चाहे वह डॉक्टर करे या आम आदमी। दूसरी ओर आरएमओ डॉ. भूपेंद्र गौर ने आरोपों से इनकार करते हुए खुद भी थाने में शिकायत देने की बात कही, लेकिन अब तक किसी भी पक्ष पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

पहले से आरोपों में घिरे हैं दोनों अफसर

यह कोई पहली बार नहीं है। सिविल सर्जन डॉ. मोसेस के खिलाफ लोकायुक्त की शिकायत पर मध्यप्रदेश सरकार अभियोजन की अनुमति दे चुकी है। वहीं आरएमओ डॉ. भूपेंद्र गौर पर भी पूर्व में मारपीट जैसे मामलों की शिकायतें रही हैं। इसके बावजूद दोनों अफसर कानून से ऊपर बैठकर अस्पताल को अपनी जागीर की तरह चला रहे हैं।

अब सवाल सीधे शासन-प्रशासन से

जब वीडियो सबूत मौजूद है तो एफआईआर क्यों नहीं? क्या बुरहानपुर में डॉक्टरों के लिए अलग कानून है? क्या अस्पताल अब गुंडों के जरिए चलाया जाएगा? बुरहानपुर जिला अस्पताल में हुआ यह कांड अब सिर्फ मारपीट नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की सड़ांध को उजागर कर रहा है। अगर अब भी कार्रवाई नहीं हुई तो यह मामला प्रदेश-स्तर की सबसे बड़ी प्रशासनिक शर्मिंदगी बनेगा।

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