बुरहानपुर। शनवारा से लालबाग रोड के भूमिपूजन ने सिर्फ विकास की नहीं, बल्कि बुरहानपुर की राजनीति की नई लड़ाई भी शुरू कर दी है। वर्तमान विधायक एवं पूर्व मंत्री अर्चना चिटनीस के तीखे कटाक्ष ने शहर की सियासत में भूचाल ला दिया है, तो वहीं पूर्व विधायक ठाकुर सुरेंद्र सिंह (शेरा भैया) ने शायराना अंदाज में पलटवार कर राजनीतिक तापमान और बढ़ा दिया है। बयानबाज़ी अब सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक गूंज रही है।
दो दिन पहले शनवारा से लालबाग तक 16.82 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाली सड़क का अनौपचारिक भूमिपूजन हुआ था। यह कार्यक्रम विकास का संदेश देने के लिए था, लेकिन मंच से निकले शब्दों ने इसे राजनीतिक अखाड़ा बना दिया। विधायक अर्चना चिटनीस ने बिना नाम लिए ऐसा तीर चलाया, जो सीधे पूर्व विधायक पर जा लगा। उन्होंने कहा—अगर गैर-जवाबदार जनप्रतिनिधि चुने जाएंगे तो जनता भी भोगती है, जनप्रतिनिधि भी भोगते हैं और पूरा शहर भोगता है। सात साल से बुरहानपुर में कोई काम नहीं हुआ। चल रहे कामों की न पूछताछ हुई, न मॉनिटरिंग हुई, न काम पूरे हुए। इससे मैं, सांसद और महापौर तक जूझ रहे हैं। नाम भले नहीं लिया गया, लेकिन इशारा साफ था— निशाना पूर्व विधायक ठाकुर सुरेन्द्र सिंह की ओर था।
क्यों हुआ सीधा टकराव? — 2018 की हार का साया
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि इस बयान के पीछे 2018 की चुनावी हार की कसक साफ झलकती है। तब ठाकुर सुरेन्द्र सिंह ने अर्चना चिटनीस को करीब 5 हजार वोटों से हराया था और पांच साल तक विधायक रहे। विधायक खेमे का आरोप है कि उस कार्यकाल में बुरहानपुर विकास में पिछड़ गया, बड़े प्रोजेक्ट अटके रहे और प्रशासनिक निगरानी कमजोर रही। वहीं शेरा समर्थक इसे राजनीतिक बदले की भाषा बता रहे हैं।
पूर्व विधायक का शायराना जवाब — तंज में तंज
विधायक के बयान के बाद ठाकुर सुरेन्द्र सिंह चुप नहीं बैठे। उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर शायरी के अंदाज में कहा— मैं खुश हूं कि वे मेरी बात तो करते हैं… बुराई करते हैं, मगर दिल से याद तो करते हैं। यह वीडियो देखते ही देखते वायरल हो गया। उनके समर्थकों ने इसे “क्लासिक जवाब” बताया, जबकि भाजपा खेमा इसे “बचाव की मुद्रा” करार दे रहा है।
शहर में दो धड़े, सोशल मीडिया पर जंग
अब बुरहानपुर दो खेमों में बंट चुका है—एक पक्ष कह रहा है: विधायक ने सच बोला। दूसरा पक्ष कह रहा है: यह सिर्फ राजनीति है, विकास का नहीं। व्हाट्सएप ग्रुप, फेसबुक पोस्ट और स्थानीय चर्चा मंचों पर आरोप-प्रत्यारोप की बाढ़ आ गई है।
मुद्दा सड़क का, लड़ाई राजनीति की
16.82 करोड़ की सड़क पर खुशी कम, राजनीति ज्यादा दिख रही है। सवाल यह है कि क्या यह सड़क सचमुच शहर की तस्वीर बदलेगी? या यह सिर्फ चुनावी राजनीति का नया हथियार बनेगी? जानकार मानते हैं कि आने वाले दिनों में विधायक और पूर्व विधायक के बीच बयानबाजी और बढ़ेगी, और 2028 विधानसभा चुनाव की नींव यहीं से पड़नी शुरू हो जाएगी।