बुरहानपुर। इंसान की आखिरी यात्रा जहां पूरी होती है, वह जगह शांति, सम्मान और गरिमा की प्रतीक मानी जाती है। लेकिन उपनगर लालबाग के चिंचाला स्थित एकमात्र श्मशान घाट में हालात इतने बदतर हैं कि यहां मौत के बाद भी सुकून नसीब नहीं हो रहा। चारों तरफ फैली गंदगी, झाड़-झंखाड़ और आवारा कुत्तों का आतंक… हालात ऐसे हैं कि अंतिम संस्कार के कुछ समय बाद ही कुत्ते अधजले शवों को खींचते और नोचते दिखाई देते हैं। यह दृश्य न केवल अमानवीय है, बल्कि समाज की संवेदनाओं को भी झकझोर देने वाला है।
शव जलने के बाद कुत्ते खींच ले जाते हैं…
चिंचाला निवासी रामलखन यादव का खेत श्मशान घाट के पीछे है। वे रोजाना इसी रास्ते से गुजरते हैं। उनका कहना है, परिजन शव को जलाकर चले जाते हैं। कुछ समय बाद कुत्ते वहां पहुंच जाते हैं और अधजले शव को खींचकर नोचते हैं। यह देखकर मन विचलित हो जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह श्मशान घाट ग्राम चिंचाला से लेकर नगर निगम क्षेत्र के कई वार्डों के लिए एकमात्र अंतिम संस्कार स्थल है। बावजूद इसके यहां कोई स्थायी निगरानी या सुरक्षा व्यवस्था नहीं है।
दफन स्थलों पर दौड़ रहे ट्रैक्टर
कुछ समुदायों द्वारा धार्मिक परंपरा के अनुसार यहां शवों को दफनाया भी जाता है। लेकिन बाउंड्री वॉल नहीं होने से श्मशान के अंदर से ही ट्रैक्टर-ट्रॉली और बैलगाड़ियां निकल रही हैं। रामलखन यादव बताते हैं, बाहर से अलग रास्ता है, फिर भी वाहन अंदर से गुजरते हैं। जहां लोगों ने अपने परिजनों को दफनाया, वहीं आज ट्रैक्टर के पहिए दौड़ रहे हैं। यह स्थिति मृतकों की गरिमा और परिजनों की भावनाओं पर सीधा आघात है।
हेडपंप के पास भी गंदगी, दशक्रिया स्थल बदहाल
श्मशान घाट में हेडपंप के पास गंदगी पसरी हुई है। दशक्रिया विधि के लिए निर्धारित स्थान पर न तो बैठने की व्यवस्था है, न ही साफ-सफाई। कांटेदार पौधे और ऊंची घास बड़ी मात्रा में फैल चुकी है, जिन्हें समय रहते हटाया जाना जरूरी है। हालांकि पहुंच मार्ग पहले से कुछ बेहतर हुआ है, लेकिन अंदर की स्थिति अभी भी चिंताजनक बनी हुई है।
मां का वचन निभाया, खुद के खर्चे से लगवाया नल
इस बदहाली के बीच एक सकारात्मक पहल भी सामने आई है। राम मंदिर चिंचाला निवासी दगडू श्यामराव सपकाडे ने अपनी मां के कहने पर स्वयं के खर्चे से खेत से श्मशान घाट तक नल कनेक्शन डलवाया। पहले यहां पानी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी। उनके इस प्रयास से पानी की समस्या कुछ हद तक दूर हुई है, लेकिन समग्र व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी अभी भी प्रशासन पर ही है।
पूर्व सफाईकर्मी कर रहा निजी प्रयास
लालबाग के पूर्व सफाईकर्मी संजय सिंह प्रहलाद सिंह अपने स्तर पर कभी-कभी श्मशान घाट की सफाई करने पहुंच जाते हैं। उनका कहना है कि यहां एक मंदिर भी स्थित है, इसलिए वे श्रद्धा से सफाई कर देते हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या श्मशान घाट की व्यवस्था अब केवल निजी प्रयासों के भरोसे ही रहेगी?
बड़ा सवाल: नगर निगम कब जागेगा?
श्मशान घाट जैसी संवेदनशील जगह पर नियमित सफाई, बाउंड्री वॉल, स्थायी कर्मचारी और सुरक्षा व्यवस्था अनिवार्य है।
स्थानीय लोगों की मांग है कि:
- श्मशान की चारदीवारी तत्काल बनाई जाए
- नियमित झाड़ू और सफाई व्यवस्था हो
- कुत्तों के आतंक पर नियंत्रण किया जाए
- दशक्रिया स्थल को व्यवस्थित और स्वच्छ बनाया जाए
- स्थायी देखरेख के लिए कर्मचारी नियुक्त किया जाए
अब देखना यह है कि जिम्मेदार विभाग कब इस दर्द को समझेगा और श्मशान घाट को उसकी गरिमा के अनुरूप सम्मान दिलाएगा। क्योंकि अंतिम यात्रा में भी अगर सम्मान न मिले, तो यह व्यवस्था पर बड़ा सवाल है।