राष्ट्रीय अपराध राजनीति मध्यप्रदेश कटनी आलेख बुरहानपुर जनसम्पर्क

मजदूरों को ‘शिल्पी’ कहने की मांग: कर्मचारी महासंघ ने कहा- विश्व के निर्माता हैं श्रमिक

—पीएफ, बीमा, वेतनमान और नियमितीकरण पर अब नहीं चलेगी देरी, 10 साल से लंबित अधिकारों पर सरकार दे फैसला

On: May 1, 2026 8:56 PM
Follow Us:
कर्मचारी महासंघ ने श्रमिक दिवस पर सरकार से उठाई बड़ी मांग

बुरहानपुर। अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस पर कर्मचारी महासंघ ने मजदूरों और श्रमिकों के सम्मान को नई पहचान देने की मांग उठाई है। कर्मचारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष ठाकुर संतोष सिंह दीक्षित ने मध्यप्रदेश सरकार से मांग की कि मजदूरों और श्रमिकों को अब “शिल्पी” कहा जाए, क्योंकि वे केवल श्रम करने वाले नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र निर्माण के असली शिल्पकार हैं।

श्री दीक्षित ने कहा कि मजदूर वर्ग पूरे विश्व का निर्माता है। छोटे से छोटे कार्य से लेकर बड़े से बड़े निर्माण तक श्रमिकों का योगदान अमूल्य है। उन्होंने कहा कि 1 मई को मजदूर दिवस के स्थान पर पूरे विश्व में “शिल्पकार दिवस” के रूप में मनाया जाना चाहिए, ताकि श्रमिक वर्ग को सम्मानजनक पहचान मिल सके।

दीक्षित बोले- मजदूरों का योगदान दुनिया कभी नहीं भूल सकती

ठाकुर संतोष सिंह दीक्षित ने कहा कि श्रमिक और मजदूर अपने पसीने से समाज, प्रदेश और देश की प्रगति का रास्ता तैयार करते हैं। चाहे निर्माण क्षेत्र हो, उद्योग हो, कृषि हो, सरकारी विभागों में सेवा हो या दैनिक श्रम से जुड़ा कोई भी क्षेत्र—हर जगह मजदूर वर्ग की मेहनत ही व्यवस्था को गति देती है। उन्होंने कहा कि मजदूरों को केवल मजदूरी करने वाला वर्ग मानना उनके योगदान को कम करके आंकना है। वे समाज के निर्माता हैं, इसलिए उन्हें शिल्पी के रूप में सम्मान दिया जाना चाहिए।

10 साल से लंबित वेतनमान का मुद्दा उठाया

श्रमिक दिवस के अवसर पर कर्मचारी महासंघ ने अंशकालीन और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों की लंबित मांगों को भी जोरदार तरीके से उठाया। श्री दीक्षित ने कहा कि प्रदेश में पिछले करीब 10 वर्षों से अंशकालीन कर्मचारियों को न्यायालय के आदेश के बावजूद न्यूनतम नियमित वेतनमान देने के आदेश जारी नहीं किए गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को नियमित नहीं किया जा रहा है। उन्हें वेतन वृद्धि, एरियर्स का भुगतान, पीएफ सुविधा और कैशलेस बीमा जैसी सुविधाओं का लाभ भी नहीं मिल पा रहा है।

न्यायालय और श्रम विभाग के आदेशों के बाद भी लाभ नहीं

श्री दीक्षित ने कहा कि इन सुविधाओं को लेकर न्यायालय और शासन के श्रम विभाग द्वारा पूर्व में आदेश जारी किए जा चुके हैं, लेकिन उच्च पदों पर बैठे अफसर ध्यान नहीं दे रहे हैं। इससे श्रमिकों, मजदूरों, दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों और अंशकालीन कर्मचारियों के अधिकारों का हनन हो रहा है। उन्होंने कहा कि अधिकारियों की अनदेखी और मजदूर विरोधी नीतियों के कारण कर्मचारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। यही वजह है कि प्रदेश के लाखों कर्मचारियों में राज्य सरकार और नौकरशाही के प्रति आक्रोश बढ़ रहा है।

संयुक्त मोर्चा ने कहा- सरकार और श्रमिक आमने-सामने नहीं, साथ-साथ चलें

संयुक्त मोर्चा के जिला अध्यक्ष अशफाक खान, संयोजक धर्मेंद्र चौकसे, अनिल बाविस्कर, राजेश साल्वे और बृजेश राठौर ने कहा कि मजदूर दिवस मनाने का वास्तविक उद्देश्य सरकार और कर्मचारियों के बीच आपसी सहयोग, तालमेल और सम्मान को बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि मजदूर दिवस का मतलब सरकार और श्रमिकों के बीच रोष पैदा करना नहीं, बल्कि एक-दूसरे के हितों को समझना और समाधान की दिशा में आगे बढ़ना है। राज्य सरकार और प्रदेश के लाखों श्रमिक एक-दूसरे के पूरक हैं। दोनों के सहयोग से ही प्रदेश का विकास संभव है।

“त्याग, तपस्या और बलिदान श्रमिकों का अभिमान”

संयुक्त मोर्चा के पदाधिकारियों ने कहा कि मजदूर और श्रमिक समाज हित, प्रदेश हित और देश हित में कार्य करते हैं। उनकी मेहनत से ही विकास की बुनियाद मजबूत होती है। श्रमिकों का त्याग, तपस्या और बलिदान ही उनका सबसे बड़ा अभिमान है। उन्होंने कहा कि श्रमिक वर्ग राष्ट्र निर्माण की सबसे मजबूत कड़ी है। यदि उनके अधिकारों की रक्षा होगी, तो प्रदेश और देश की प्रगति और तेज होगी।

सरकार से मांग- लंबित मांगों पर तत्काल निर्णय हो

कर्मचारी महासंघ ने राज्य सरकार से मांग की कि अंशकालीन कर्मचारियों को न्यूनतम नियमित वेतनमान देने, दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को नियमित करने, वेतन वृद्धि, एरियर्स, पीएफ और कैशलेस बीमा जैसी सुविधाओं पर तत्काल निर्णय लिया जाए। पदाधिकारियों ने कहा कि मजदूरों और कर्मचारियों के अधिकारों की अनदेखी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सरकार को न्यायालय और श्रम विभाग के आदेशों के अनुरूप जल्द कार्रवाई करनी चाहिए।

श्रमिक एकता का संदेश

अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस पर कर्मचारी महासंघ और संयुक्त मोर्चा ने श्रमिक एकता का संदेश देते हुए कहा कि मजदूर-मजदूर भाई-भाई हैं और अपने अधिकारों के लिए संगठित होकर आवाज उठाते रहेंगे।

पदाधिकारियों ने कहा—“श्रमिक एकता जिंदाबाद, मजदूर-मजदूर भाई-भाई, लेकर रहेंगे पाई-पाई।”

ये भी पढ़े- बहादरपुर सूत मिल गेट पर मजदूरों की ‘उम्मीदों की अर्थी’: 28 साल से पेंशन-ग्रेच्युटी के इंतजार में मजदूर

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

और पढ़ें

मांडवा में जंगल में प्रसव के बाद आरोग्यम केंद्र बंद मिलने पर ग्रामीणों में आक्रोश

जंगल में नवजात का जन्म, आरोग्यम केंद्र पर ताला: मांडवा की घटना ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठाए सवाल

बुरहानपुर पुलिस ने पाचोरी के जंगल में अवैध हथियार फैक्ट्री से सामग्री जब्त की

पहले कार से पकड़ा तस्कर, फिर पूछताछ में खुला जंगल का राज: पाचोरी में हथियार फैक्ट्री पर पुलिस की फिल्मी स्टाइल में दबिश

प्राकृतिक आपदा से प्रभावित किसानों के बीच पहुंचे प्रभारी मंत्री तुलसीराम सिलावट।

किसानों के दर्द के बीच खेतों में उतरे प्रभारी मंत्री, बोले- न कोई गांव छूटेगा, न कोई किसान

विवाहिता आदिवासी महिला के मामले पर बढ़ा आक्रोश

मुस्लिम युवक पर तीन बच्चों की मां को भगाने का आरोप, नेपानगर थाने पहुंचे हिंदू संगठन; कार्रवाई की मांग

सांसद ज्ञानेश्वर पाटील ने मुख्यमंत्री मोहन यादव से बुरहानपुर केला किसानों के लिए मुआवजा और फसल बीमा की मांग की

केला किसानों की पीड़ा लेकर सीएम से मिले सांसद पाटील, बोले- मौसम आधारित फसल बीमा अब जरूरी

नल-जल योजना के दावों पर सवाल,

जल संकट: प्यास के लिए मौत का रास्ता, 150 फीट गहरी पहाड़ी उतरकर गंदा पानी ला रहे आदिवासी

Leave a Comment

PNFPB Install PWA using share icon

For IOS and IPAD browsers, Install PWA using add to home screen in ios safari browser or add to dock option in macos safari browser