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जंगल में ‘ऑपरेशन गिद्ध’: 72 घंटे की सर्च, ऐप से सीधे भोपाल तक निगरानी

- परमानंद गोविंदजीवाला ऑडिटोरियम में हुई वनकर्मियों की एक दिवसीय कार्यशाला और सह प्रशिक्षण

बुरहानपुर। जिले में वन विभाग की ओर से 20 फरवरी से गिद्ध गणना शुरू की जाएगी। इसे लेकर गुरूवार को परमानंद गोविंदजीवाला ऑडिटोरियम में वनकर्मियों की एक दिवसीय कार्यशाला और सह प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। जिसमें बुरहानपुर डीएफओ विद्याभूषण सिंह सहित अन्य वन अफसर, सभी रेंज के रेंजर्स, वनकर्मी मौजूद थे।

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20 से 22 फरवरी तक जिले में मोबाइल ऐप के जरिए होगी गिद्धों की डिजिटल गणना

वन मंडल बुरहानपुर के तहत वन अपराध अन्वेषण, न्यायालयीन प्रक्रिया, वन विधि और गिद्ध गणना पर कार्यशाला में प्रेजेंटेशन के माध्यम से चर्चा की गई। डीएफओ विद्या भूषण सिंह ने वन अपराध अन्वेषण, न्यायालयीन प्रक्रिया, वन विधि विषय पर प्रशिक्षण दिया। साथ ही वन अपराध अन्वेषण की बारीकियों पर शाहपुर टीआई अखिलेश मिश्रा ने बात रखी। एडीपीओ ने वन अपराधों को न्यायालय में प्रस्तुत करने की प्रक्रिया के बारे में बताया। साथ ही 20 फरवरी से शुरू हो रही गिद्धों की गणना को लेकर एसडीओ बुरहानपुर अजय सागर, रेंजर लक्ष सोलंकी और हरीश राठौर ने वनकर्मियों को प्रशिक्षण दिया। कार्यशाला में नेपानगर एसडीओ विक्रम सुलिया, शाहपुर रेंजर श्यामलता मरावी, बोदरली रेंजर लखनलाल वास्कले, खकनार रेंजर रितेश उईके, असीरगढ़ रेंजर धर्मेंद्र सिंह राठौर, धूलकोट रेंजर मनोज वास्कले, नेपानगर के प्रभारी रेंजर व ट्रेनी आईएफएस अजय गुप्ता, नावरा रेंजर पुष्पेंद्र जादौन सहित काफी संख्या में वनकर्मी मौजूद थे।

20 से तीन दिन तक 2 घंटे ऐप से होगी गणना

बुरहानपुर एसडीओ अजय सागर ने बताया मोबाइल ईपी कलेक्ट 5 के माध्यम से 20 से 22 फरवरी तक तीन दिन जिले में गिद्ध गणना होगी जो हर वन क्षेत्र का बीट गार्ड करेगा। ऐप के माध्यम से कौन सी प्रजाति कितनी संख्या में हैं। उसकी लोकेशन सभी ईपी कलेक्ट 5 में दर्ज की जाएगी जो सीधे भोपाल में दिखेगी। करीब छह माह पहले भी जिले में गिद्ध गणना हुई थी, लेकिन तब गिद्ध नहीं मिले थे, लेकिन असीरगढ़ सहित अन्य कुछ क्षेत्रों में उनके निशान जरूर मिले थे। गणना की इंट्री पहले कागज पर करते थे, अब ऐप पर होगी।

क्यों जरूरी है यह गणना?

मध्यप्रदेश में गिद्धों की संख्या में लगातार गिरावट चिंता का विषय है। छह माह पहले हुई गणना में जिले में प्रत्यक्ष गिद्ध नहीं मिले थे, हालांकि असीरगढ़ सहित कुछ इलाकों में उनके संकेत दिखे थे। विशेषज्ञ मानते हैं कि गिद्ध प्राकृतिक सफाईकर्मी हैं इनकी मौजूदगी पारिस्थितिकी संतुलन की कुंजी है। वन विभाग का मानना है कि सटीक आंकड़े ही संरक्षण की ठोस रणनीति का आधार बनेंगे। तीन दिन का यह अभियान तय करेगा कि जिले के आसमान में गिद्धों की वापसी कितनी दूर है और उन्हें बचाने के लिए अगला कदम क्या होगा।

ये भी पढ़े- सलई-धावड़ा गोंद पर तत्काल प्रतिबंध, हाईकोर्ट के आदेश के बाद वन विभाग सख्त

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