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बीमार महिला को डेढ़ किमी खटिया पर ढोया: 10 साल से पुलिया का इंतजार, गांव तक नहीं पहुंचती एंबुलेंस

मोहद-बोरकी बलड़ी के ग्रामीण जनसुनवाई में पहुंचे; बोले- जियो-टेक सर्वे भी हो गया, फिर भी नहीं बनी पुलिया, एक दिन पहले बीमार महिला को खटिया पर पहुंचाया एंबुलेंस तक

बुरहानपुर। जिले के मोहद-बोरकी बलड़ी गांव में एक खराब पुलिया ने ग्रामीणों की राह ही नहीं, आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं का रास्ता भी रोक रखा है। ग्रामीणों का दावा है कि करीब 10 साल से समस्या बनी हुई है। बारिश में पुलिया पर पानी भरने के कारण एंबुलेंस गांव के अंदर तक नहीं पहुंच पाती। नतीजा यह कि बीमार व्यक्ति को पहले करीब डेढ़ किलोमीटर खटिया पर उठाकर मुख्य रास्ते तक लाना पड़ता है, तब कहीं जाकर एंबुलेंस मिलती है।

Sadaiv News
बुरहानपुर के मोहद-बोरकी बलड़ी में खराब पुलिया के कारण मरीज को खटिया पर ले जाते ग्रामीण

ग्रामीणों के मुताबिक यह केवल कागजों में दर्ज शिकायत नहीं, बल्कि उनकी रोजमर्रा की परेशानी है। एक दिन पहले ही गांव की एक बीमार महिला की तबीयत बिगड़ी तो एंबुलेंस को गांव तक पहुंचना था, लेकिन खराब पुलिया आड़े आ गई। मजबूरन ग्रामीण महिला को खटिया पर लेकर करीब डेढ़ किलोमीटर चले और एंबुलेंस तक पहुंचाया। इसी परेशानी को लेकर मंगलवार को ग्रामीण जनसुनवाई में पहुंचे। प्रशासन के सामने खराब पुलिया, सड़क और स्ट्रीट लाइट की समस्या रखी और जल्द निराकरण की मांग की।

ग्रामीणों का सवाल- सर्वे हो गया तो पुलिया कब बनेगी?

ग्रामीण प्रमोद एकनाथ सोनी ने बताया कि बोरकी बलड़ी में हाईस्कूल भी संचालित है। इसी रास्ते से विद्यार्थियों और ग्रामीणों का आवागमन होता है। पुलिया खराब होने से केवल मरीज ही नहीं, स्कूल जाने वाले विद्यार्थियों और आम ग्रामीणों को भी परेशानी उठानी पड़ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि पुलिया का जियो-टेक सर्वे तक हो चुका है, लेकिन इसके बाद भी निर्माण नहीं कराया गया। ऐसे में ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं कि जब तकनीकी प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है तो पुलिया निर्माण आखिर कब शुरू होगा?

बारिश आते ही रास्ता बना मुसीबत, मरीज-बुजुर्ग सबसे ज्यादा परेशान

बारिश में समस्या और गंभीर हो जाती है। ग्रामीणों के मुताबिक पुलिया में पानी भरने के कारण रास्ते से वाहन निकालना मुश्किल हो जाता है। एंबुलेंस चालक भी वाहन गांव के अंदर ले जाने से मना कर देते हैं। ऐसे में मरीज को अस्पताल पहुंचाने की पहली चुनौती ही उसे गांव से बाहर एंबुलेंस तक पहुंचाना बन जाती है। इस स्थिति से मरीजों के साथ बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं के लिए आपात स्थिति में जोखिम बढ़ जाता है। समय पर इलाज के लिए जहां एंबुलेंस की जरूरत होती है, वहीं यहां पहले मरीज को खटिया पर लेकर लंबी दूरी तय करनी पड़ती है।

हाईस्कूल भी गांव में, विद्यार्थियों की राह भी आसान नहीं

ग्रामीणों ने बताया कि गांव में हाईस्कूल होने के कारण विद्यार्थियों का नियमित आवागमन इसी क्षेत्र से होता है। खराब पुलिया और बारिश में पानी भरने से उन्हें भी परेशानी होती है। ग्रामीणों का कहना है कि समस्या नई नहीं है। वे करीब एक दशक से इसके समाधान का इंतजार कर रहे हैं।

सड़क के साथ अंधेरे की भी समस्या, स्ट्रीट लाइट की मांग

जनसुनवाई में ग्रामीणों ने केवल पुलिया ही नहीं, गांव की अन्य बुनियादी समस्याएं भी प्रशासन के सामने रखीं। गांव में स्ट्रीट लाइट नहीं होने की शिकायत करते हुए रात में आवागमन में परेशानी होने की बात कही। ग्रामीणों ने प्रशासन से पुलिया का निर्माण कराने के साथ संपर्क मार्ग और स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था दुरुस्त कराने की मांग की। जनसुनवाई में अधिकारियों ने ग्रामीणों की शिकायत सुनी। ग्रामीणों के अनुसार उन्हें समस्याओं का जल्द समाधान कराने का आश्वासन दिया गया है। अब ग्रामीणों की निगाह इस बात पर है कि करीब 10 साल से चली आ रही समस्या आश्वासन से आगे बढ़कर निर्माण तक कब पहुंचती है।

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