बुरहानपुर/खकनार। खकनार जनपद पंचायत की साधारण सभा की बैठक शनिवार को विकास पर चर्चा से पहले ही ‘प्रतिनिधियों की एंट्री’ के मुद्दे पर उलझ गई। बैठक के लिए जारी पत्र में निर्वाचित जनपद सदस्यों को बुलाया गया था, लेकिन उनके प्रतिनिधियों को अपेक्षित नहीं किया गया। इसी बात पर अध्यक्ष-उपाध्यक्ष सहित सदस्य नाराज हो गए। करीब 25 निर्वाचित सदस्यों ने बैठक का बहिष्कार कर दिया। बाद में कार्यालय के सामने जनपद सीईओ सुनीता बघेल के खिलाफ नारेबाजी हुई। इसी विरोध में सदस्यों ने क्षेत्रों में विकास कार्य नहीं होने का मुद्दा भी जोड़ दिया और चेतावनी दी—जल्द काम शुरू नहीं हुए तो कलेक्टर के सामने सामूहिक इस्तीफा देंगे। पूरे घटनाक्रम में एक बात स्पष्ट है कि बैठक के बहिष्कार की तात्कालिक वजह केवल विकास कार्य नहीं, बल्कि सीईओ की ओर से जारी वह पत्र भी था, जिसमें सदस्यों के प्रतिनिधियों को बैठक में अपेक्षित नहीं किया गया था।
दरअसल साधारण सभा शुरू होने से पहले पत्र में प्रतिनिधियों को अपेक्षित नहीं किए जाने का मामला उठा। जनपद सदस्यों ने इसका विरोध किया और बैठक में शामिल होने से इनकार कर दिया। इसके बाद सीईओ सुनीता बघेल ने सदस्यों से चर्चा की। उन्होंने समझाने का प्रयास किया कि साधारण सभा की बैठक के लिए नियमानुसार पत्र जारी कर निर्वाचित सदस्यों को सूचना दी गई है और उनके प्रतिनिधियों को अपेक्षित नहीं किया गया। लेकिन बात नहीं बनी। सदस्य अपनी नाराजगी पर अड़े रहे और बैठक का बहिष्कार जारी रखा।
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वार्ता बेनतीजा, सीईओ निकलीं; बाहर शुरू हो गई नारेबाजी
समझाइश के बावजूद सदस्य बैठक में शामिल नहीं हुए। इसके बाद सीईओ वहां से अपने निवास के लिए रवाना हो गईं। उनके जाने के बाद अध्यक्ष राकेश सोलंकी, उपाध्यक्ष आरती चौकसे सहित सदस्य जनपद कार्यालय के सामने एकत्रित हुए और सीईओ के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। यहीं से विवाद प्रतिनिधियों की बैठक में मौजूदगी से आगे बढ़कर विकास कार्यों तक पहुंच गया। सदस्यों ने आरोप लगाया कि उनके निर्वाचन क्षेत्रों में अपेक्षित काम नहीं हो रहे हैं। जनता उनसे विकास का हिसाब मांगती है, लेकिन काम नहीं होने के कारण निर्वाचित प्रतिनिधियों को जवाब देना मुश्किल हो रहा है।
अब सीधे इस्तीफे की चेतावनी—‘काम नहीं हुए तो कलेक्टर के पास जाएंगे’
नाराज सदस्यों ने विरोध के दौरान प्रशासन पर दबाव बढ़ाते हुए सामूहिक इस्तीफे की चेतावनी दे दी। उनका कहना है कि जनपद क्षेत्र में जल्द विकास कार्य शुरू नहीं हुए तो सभी सदस्य कलेक्टर के समक्ष पहुंचकर सामूहिक इस्तीफा देंगे। कुछ देर तक नारेबाजी करने के बाद सदस्य कार्यालय से लौट गए, लेकिन सामूहिक इस्तीफे की चेतावनी ने जनपद की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में नया सवाल खड़ा कर दिया है।
निर्वाचित सदस्य हैं तो प्रतिनिधियों की जरूरत क्यों?
इस विवाद में एक अहम सवाल प्रतिनिधियों की भूमिका को लेकर भी खड़ा हुआ है। साधारण सभा निर्वाचित जनपद सदस्यों की थी और सीईओ का स्पष्ट पक्ष है कि पत्र नियमानुसार जारी किया गया था तथा प्रतिनिधियों को अपेक्षित नहीं किया गया था। दूसरी तरफ इसी व्यवस्था को लेकर बड़ी संख्या में निर्वाचित सदस्यों ने बैठक का बहिष्कार कर दिया। ऐसे में अब यह स्पष्ट होना जरूरी है कि सदस्य प्रतिनिधियों को बैठक में शामिल करने पर क्यों अड़े थे और पूर्व में ऐसी बैठकों में प्रतिनिधियों की मौजूदगी की क्या व्यवस्था रही है।
अध्यक्ष-उपाध्यक्ष सहित ये सदस्य विरोध में
विरोध में अध्यक्ष राकेश सोलंकी, उपाध्यक्ष आरती दिनेश चौकसे सहित रितु संजय, रायसिंह अनारसिंह भूरिया, कविता सुरेश पवार, शारदा रायसिंह, शिवलाल देवतराम भिलावेकर, देविदास किसन जामबेकर, पुष्पा भीमसिंह, सुमन हरिराम पटेल, नंदकिशोर पन्नालाल, शर्मिला पूनमचंद कारडेकर, मीराबाई गणेश भिलावेकर, सुनीता शांताराम, गजाधर बेडिया, कोटारानी बाई ईग्राम, कमला हरी, हरी धर्मा राठौड़, सुभाष शिवकुमार परिहार, शंकर मेहरचंद, ज्योति सालिकराम पाटील, समोती मंगल, गणेश सुपरकिंग, गोकुल रामदास पाटील और मनीषा विजय चौधरी सहित सदस्य शामिल रहे।
नियमानुसार पत्र जारी किया, प्रतिनिधि अपेक्षित नहीं थे
साधारण सभा की बैठक के लिए नियमानुसार पत्र जारी कर सदस्यों को सूचना दी गई थी। पत्र में जनपद सदस्यों के प्रतिनिधियों को अपेक्षित नहीं किया गया था। इसी को लेकर सदस्यों ने नाराजगी जताई। उन्हें समझाने का प्रयास किया गया, लेकिन वे बैठक में शामिल होने के लिए नहीं माने। – सुनीता बघेल, सीईओ- जनपद पंचायत खकनार



