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मां की गोद से 9 महीने की बच्ची को छीनकर स्कूल ले गया दरिंदा, निर्वस्त्र हालत में मिला; कोर्ट ने सुनाई 5 साल की सजा

बुरहानपुर। जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र में इंसान के चेहरे में छिपे दरिंदे का घिनौना चेहरा सामने आया। गांव में 9 माह की मासूम को मां की गोद से छीनकर सुनसान स्कूल में ले जाकर उसके साथ अश्लील हरकत करने वाले आरोपी पवन पाटील को विशेष पॉक्सो कोर्ट ने 5 साल की सजा और 4,000 […]

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बुरहानपुर। जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र में इंसान के चेहरे में छिपे दरिंदे का घिनौना चेहरा सामने आया। गांव में 9 माह की मासूम को मां की गोद से छीनकर सुनसान स्कूल में ले जाकर उसके साथ अश्लील हरकत करने वाले आरोपी पवन पाटील को विशेष पॉक्सो कोर्ट ने 5 साल की सजा और 4,000 रु. जुर्माना सुनाया है।
दरअसल 1 दिसंबर 2024 की दोपहर। गांव की एक महिला अपनी 9 महीने की बच्ची को गोद में लेकर ओटले पर बैठी थी। तभी वहां पहुंचा पवन पाटील। बच्ची की तबीयत पूछी और कुछ ही पलों में बच्ची को झपटकर मां की गोद से छीन लिया। महिला की चीख गांव में गूंज गई। देवर दौड़कर आया। खोजबीन शुरू हुई।
स्कूल से आई रोने की आवाज, टूटी दीवार से झांका… और रूह कांप गई
पास के स्कूल से बच्चे की रोने की आवाज आई। छुट्टी के कारण स्कूल बंद था। देवर ने टूटी दीवार से झांककर देखा, पवन पाटील निर्वस्त्र था। जमीन पर लेटा हुआ था। बच्ची को अपने ऊपर बैठाकर पकड़े हुए था। यह दृश्य देख उसकी रूह कांप गई। बच्ची को तुरंत बचाया गया। आरोपी को खदेड़ दिया गया।
शाहपुर थाने में एफआईआर, धाराएं इतनी सख्त कि बचना मुश्किल नहीं था
घटना के कुछ ही घंटों में शाहपुर थाने में एफआईआर दर्ज की गई। धारा 137(2), 74, 75(1)(आई) बीएनएस, पॉक्सो एक्ट की धारा 7/8 और 9/10 थाने से सीधा चार्जशीट कोर्ट में पेश की गई। केस की गंभीरता को देखते हुए विशेष लोक अभियोजक रामलाल रंधावे ने कमान संभाली।
कोर्ट ने कहा – मासूमों की ओर उठने वाली नज़र को अब सलाखों से देखना होगा
प्रकरण की सुनवाई विशेष पॉक्सो न्यायालय, बुरहानपुर में हुई। पेश किए गए सबूत, गवाह और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर कोर्ट ने आरोपी को दो धाराओं में सजा सुनाई। धारा 9/10 पॉक्सो एक्ट – 5 साल सश्रम कारावास + 3,000 रु. जुर्माना, धारा 137(2) बीएनएस – 5 साल सश्रम कारावास + 1,000 रु. जुर्माना (दोनों सजाएं साथ चलेंगी)।
विशेष लोक अभियोजक रामलाल रंधावे ने कहा यह सिर्फ एक कानूनी मामला नहीं था। यह समाज के उस हिस्से पर चोट थी जो मासूमियत की रक्षा करने में नाकाम हो रहा है। इस फैसले से अब हर दरिंदे को पता चल जाएगा कि बच्चियों की तरफ उठने वाली नज़र अब सीधे जेल तक पहुंचाएगी।

 

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