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हाईकोर्ट की सख्ती: बुरहानपुर कलेक्टर को अवमानना नोटिस, 4500 छात्रों वाले स्कूल की बेदखली पर जवाब तलब

केंद्र सरकार की जमीन पर जिला प्रशासन का एक्शन? हाईकोर्ट ने कलेक्टर से मांगा जवाब

जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने प्रशासनिक मनमानी पर सख्त रुख अपनाते हुए बुरहानपुर कलेक्टर हर्ष सिंह को अवमानना का नोटिस जारी किया है। जस्टिस विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने कलेक्टर से तीखे सवाल पूछते हुए कहा कि जब हाईकोर्ट ने पहले ही कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगा दी थी, तो फिर 4500 छात्रों वाले स्कूल को बेदखल करने का आदेश किस अधिकार से पारित किया गया? अदालत ने इस गंभीर मामले में अगली सुनवाई 24 फरवरी को तय की है।

हाईकोर्ट के आदेश को किया नजरअंदाज

यह मामला चिल्ड्रन्स एजुकेशन सोसायटी और नेहरू मॉन्टेसरी सीनियर सेकेंडरी स्कूल बुरहानपुर की ओर से हाईकोर्ट में दायर याचिका से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं ने बताया कि बुरहानपुर स्थित ताप्ती मिल द्वारा स्कूल संचालन के लिए जमीन आवंटित की गई थी। बाद में ताप्ती मिल को बीमारू घोषित किए जाने के बाद उसका राष्ट्रीयकरण हुआ और मिल केंद्र सरकार के अधीन चली गई। बावजूद इसके, उसी भूमि पर वर्षों से स्कूल का संचालन निर्बाध रूप से होता रहा।

28 जनवरी 2024 को लग चुकी थी कार्रवाई पर रोक

याचिका में स्पष्ट किया गया कि ताप्ती मिल से जुड़ी प्रशासनिक कार्रवाई पर हाईकोर्ट ने 28 जनवरी 2024 को स्पष्ट रोक लगा दी थी। इसके बावजूद बुरहानपुर कलेक्टर ने 9 दिसंबर 2025 को स्कूल की बेदखली का आदेश जारी कर दिया। इसी आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई, जिस पर अदालत ने इसे गंभीर अवहेलना माना।

केंद्र सरकार के अधीन संपत्ति, फिर कलेक्टर कैसे बना मालिक?

प्रारंभिक सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अर्पण जे. पवार और अधिवक्ता चिरंजीव शर्मा ने जोरदार दलीलें रखीं। उन्होंने कहा ताप्ती मिल अब पूरी तरह केंद्र सरकार के नियंत्रण में है। जिला कलेक्टर को किसी भी प्रकार की बेदखली का अधिकार नहीं है। स्कूल में वर्तमान में 4500 छात्र अध्ययनरत हैं। करीब 250 शिक्षक व कर्मचारी यहां कार्यरत हैं। एक आदेश से हजारों छात्रों का भविष्य संकट में डाल दिया गया।

अदालत ने माना गंभीर अवमानना

हाईकोर्ट ने प्रारंभिक सुनवाई में माना कि न्यायालय के आदेश के बावजूद प्रशासन ने कार्रवाई की। क्षेत्राधिकार न होते हुए भी आदेश पारित किया गया। यह सीधा-सीधा न्यायालय की अवमानना का मामला बनता है। इसी को गंभीरता से लेते हुए कोर्ट ने बुरहानपुर कलेक्टर को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए।

हजारों छात्रों का भविष्य दांव पर

यह मामला सिर्फ जमीन या आदेश तक सीमित नहीं है, बल्कि 4500 छात्रों की पढ़ाई, 250 कर्मचारियों की रोजी-रोटी और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़ा है। अब सबकी निगाहें 24 फरवरी को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि प्रशासनिक लापरवाही पर हाईकोर्ट कितना सख्त रुख अपनाता है।

ये भी पढ़े- पुलिया की आड़ में सरकारी जमीन पर कब्जा, अवध वाटिका पर चलेगा प्रशासन का बुलडोजर!

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