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SDM और सिटी मजिस्ट्रेट को संभालनी पड़ी कमान
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बुरहानपुर में शिक्षा विभाग बना प्रदर्शन का अखाड़ा, छात्रों का सवाल – अधिकारी मौन क्यों हैं?
बुरहानपुर। शहर में सोमवार को छात्रों का आक्रोश फूट पड़ा। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के कार्यकर्ताओं ने शिक्षा विभाग कार्यालय पर ताला जड़ दिया। ताला लगते ही अंदर मौजूद एक दर्जन से अधिक अधिकारी-कर्मचारी बंधक बन गए।
अभाविप कार्यकर्ताओं का आरोप है कि निजी स्कूलों की मनमानी और बेतहाशा फीस वृद्धि पर शिकायतों और ज्ञापनों के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई।
एक घंटे तक ऑफिस में फंसे रहे अधिकारी, गेट पर लगा रहा ताला
सुबह कार्यालय खुलते ही ABVP के युवाओं ने गेट पर पहुंचकर नारेबाजी शुरू कर दी। देखते ही देखते उन्होंने मुख्य प्रवेश द्वार पर ताला जड़ दिया। अंदर पहले से मौजूद कर्मचारी और अधिकारी एक घंटे तक कार्यालय में फंसे रहे। कोई बाहर निकल नहीं पाया, न ही अंदर जा पाया।
कई बार बोले, लेकिन अधिकारी मौन बैठे हैं
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद नगर मंत्री प्रियांशु ठाकुर ने कहा, हमने कई बार ज्ञापन दिए, मौखिक शिकायतें कीं। कहा कि निजी स्कूलों की मनमानी रोकी जाए, फीस वृद्धि पर लगाम लगे, और छात्रों को फीस न भरने पर परीक्षा से वंचित न किया जाए। लेकिन जिला शिक्षा अधिकारी ने आज तक कोई जवाब नहीं दिया। ABVP नेताओं ने दो टूक कहा – अब चुप नहीं बैठेंगे।
नारेबाजी, ताला-बंदी और धरना – सड़क पर उतरे छात्र
छात्रों ने कार्यालय के बाहर ही धरना शुरू कर दिया। शिक्षा विभाग होश में आओ, फीस माफ नहीं तो परीक्षा नहीं जैसे नारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा। कुछ कार्यकर्ता तख्तियां लेकर बैठे थे, तो कुछ गेट के सामने बैठकर अधिकारियों के जवाब का इंतजार कर रहे थे।
प्रशासन हरकत में आया, मौके पर पहुंचे SDM और सिटी मजिस्ट्रेट
स्थिति बेकाबू न हो, इसके लिए प्रशासन को हस्तक्षेप करना पड़ा। SDM अजमेर सिंह गौड़ और सिटी मजिस्ट्रेट राजेश पाटीदार मौके पर पहुंचे और ABVP नेताओं से चर्चा की। आखिरकार प्रशासन के कार्रवाई के आश्वासन के बाद ताला खोला गया और धरना समाप्त किया गया।
सिटी मजिस्ट्रेट राजेश पाटीदार ने कहा किसी भी सरकारी कार्यालय पर ताला लगाना कानूनन गलत है। हम इस पूरे मामले की जानकारी कलेक्टर को देंगे और आगे की कार्रवाई उन्हीं के निर्देशों पर होगी।
क्या हैं छात्रों की मुख्य मांगें?
• निजी स्कूलों द्वारा की जा रही बेतहाशा फीस वृद्धि पर रोक
• फीस न भर पाने पर छात्रों को परीक्षा देने से न रोका जाए
• जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई की जाए
• शिक्षा विभाग को निजी स्कूलों की मनमानी पर सख्ती से रोक लगानी चाहिए
प्रशासन ने माना- ताला जड़ना गलत, लेकिन मुद्दे गंभीर
प्रशासन ने यह साफ किया कि किसी भी कार्यालय में ताला जड़ना और अधिकारियों को बंधक बनाना न्यायसंगत नहीं है। लेकिन उन्होंने यह भी माना कि छात्रों की शिकायतें वाजिब हैं और उन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
अब सवाल ये – क्या सिर्फ आश्वासन से हल होंगे छात्र-शिक्षा के सवाल?
कई सालों से निजी स्कूलों की फीस नीति और मनमानी पर सवाल उठते रहे हैं। मगर आज भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। क्या अब जिला प्रशासन इस मामले में ठोस कदम उठाएगा या फिर छात्रों को एक बार फिर आंदोलन की राह पकड़नी पड़ेगी?