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गंदा पानी, पार्षद पुत्रों को ठेके और ‘नींबू मिर्च’ टोटका… निगम सम्मेलन में एक साथ फूटे कई मुद्दे

विपक्ष के अलावा सत्ता पक्ष ने भी उठाया शहर के विभिन्न मुद्दे बुरहानपुर। नगर निगम सम्मेलन सोमवार को परमानंद गोविंदजीवाला ऑडिटोरियम में आयोजित हुआ, लेकिन यह महज़ एक बजट पेशी नहीं रहा। सम्मेलन बहस, विरोध, तंज और ‘जुगाड़ टोटकों’ की चपेट में आ गया। गंदे पानी की सप्लाई, पार्षद पुत्रों को दिए गए टेंडरों और […]

  • विपक्ष के अलावा सत्ता पक्ष ने भी उठाया शहर के विभिन्न मुद्दे

बुरहानपुर। नगर निगम सम्मेलन सोमवार को परमानंद गोविंदजीवाला ऑडिटोरियम में आयोजित हुआ, लेकिन यह महज़ एक बजट पेशी नहीं रहा। सम्मेलन बहस, विरोध, तंज और ‘जुगाड़ टोटकों’ की चपेट में आ गया। गंदे पानी की सप्लाई, पार्षद पुत्रों को दिए गए टेंडरों और निगम की आय बढ़ाने जैसे गंभीर मुद्दों पर तीखी बहस हुई। इतना ही नहीं, पार्षद गौरव शुक्ला नजरबट्टू के रूप में नींबू-मिर्च तक ले आए ताकि सम्मेलन बिना रुकावट पूरा हो।
Sadaiv Newsदरअसल सुबह 11 बजे शुरू हुआ सम्मेलन इस बार सिर्फ आंकड़ों पर नहीं, हालात पर केंद्रित रहा। प्रश्नकाल के दौरान बैरी मैदान के पार्षद शाहिद बंदा ने दो बोतलें दिखाकर मंच हिला दिया। एक बोतल में मटमैला पानी था, जो जनता को दिया जा रहा है, दूसरी में आरओ का साफ पानी था, जो पार्षदों को मिलता है। शाहिद बोले जनता करोड़ों का टैक्स दे रही है, फिर गंदा पानी क्यों? क्या वॉटर वर्क्स के अफसर इसे पी सकते हैं?
आयुक्त संदीप श्रीवास्तव ने कहा पानी जांच के पैरामीटर होते हैं। पानी के कलर से भी जांच होती है। उसी आधार पर यह पानी के सैंपल की जांच हुई है। वहीं सत्तापक्ष के कुछ पार्षदों ने भी इस मुद्दे का समर्थन किया कि नगर में कईं जगह तीन तरह का पानी वितरण हो रहा है। एक जो निजी कंपनी कर रही है। दूसरा नगर निगम ताप्ती सम्पवेल से कर रहा है और तीसरा ट्यूबवेल के माध्यम से वितरण होता है। टंकियों से पानी वितरण की जांच पार्षदों ने की थी, लेकिन जांच निजी कंपनी के पानी की करा दी गई। पार्षद ने फिर पलटवार किया—तो मिठाई पर मक्खी बैठी हो, धूल लगी हो और कहा जाए खाने लायक है?
पार्षद पुत्रों की फर्मों को टेंडर, विपक्ष भड़का
Sadaiv Newsविपक्षी पार्षद फहीम हाशमी ने जब सवाल उठाया कि पार्षदों के बेटे और भाइयों की फर्मों को निगम से कार्यादेश कैसे मिल रहे हैं, तो सदन में सन्नाटा छा गया। उन्होंने खुलकर कहा—क्या आयुक्त को नहीं मालूम कि यह पार्षद पुत्र की फर्म है? नियम तो यह कहता है कि लाभ लेने वाले पार्षद को आयोग्य घोषित किया जा सकता है। आयुक्त बोले—ऑनलाइन टेंडर प्रक्रिया में रोक नहीं है। आयुक्त ने कहा यह जांच का विषय है। हम 45 दिन में जांच कराएंगे। इस पर फिर तीखी प्रतिक्रिया आई—नियम सब पर बराबर क्यों नहीं? एक पार्षद ने कहा मेरे बेटे ने टेंडर डाला था तो मुझे नोटिस मिला था।
बजट पास हो इसलिए ‘नजरबट्टू’ टोटका: गेट पर टांगे नींबू-मिर्च
Sadaiv Newsपिछले दो सम्मेलन हंगामे में स्थगित हो चुके थे। इस बार पार्षद गौरव शुक्ला अपने साथ नींबू-मिर्च लेकर पहुंचे और गेट पर टांग दिए। उनकी दलील थी हर बार नजर लग जाती है, इसलिए आज बजट को नजरबट्टू से बचाना ज़रूरी था। पार्षद गौरव शुक्ला ने कहा-नगर के नागरिकों ने यह मौका दिया। पहले दो बजट सत्तापक्ष के झगड़े के कारण पास नहीं हो पाया। बजट पर बार बार नजर लग रही थी। इसलिए आज सभागृह के बाहर नींबू, मिर्च लगाई।
निगम की आय बढ़ाने के सुझाव भी आए
आयुक्त संदीप श्रीवास्तव, निगम अध्यक्ष अनीता यादव, महापौर माधुरी अतुल पटेल की मौजूदगी में सम्मेलन हुआ। जिसमें 267 करोड़ का बजट भी प्रस्तुत किया गया। कुछ पार्षदों ने नगर निगम की आय बढ़ाने को लेकर सुझाव दिए। हाकर्स झोन बनाने, पाला बाजार को हटाने की बजाए कोई व्यवस्था करने, चिन्हित कुछ क्षेत्रों में ही अतिक्रमण मुहीम चलाने पर सवाल उठाए गए।
8.85 करोड़ की सौगात पर सांसद को धन्यवाद
नगर निगम सम्मेलन में भाजपा पार्षद भरत भोंसले ने खंडवा सांसद ज्ञानेश्वर पाटील का आभार जताया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2022 में सांसद की पहल पर बुरहानपुर के लिए 8.85 करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत कराई गई थी, जिससे कड़वी शाह, बुधवारा, खैरखानी और शनवारा नालों का चैनलाइजेशन कार्य जारी है। नगर निगम आयुक्त संदीप श्रीवास्तव ने बताया कि यह राशि आपदा प्रबंधन निधि से मिली थी, लेकिन आचार संहिता के कारण कार्य में देरी हुई। अब काम प्रगति पर है। बारिश में जलभराव से जूझने वाले इलाकों को इससे स्थायी राहत मिलने की उम्मीद है।
निगम सम्मेलन के अहम बिंदु – एक नजर में
– 267 करोड़ का बजट पेश
– 45 सवालों पर चर्चा
– गंदा पानी बना सबसे बड़ा मुद्दा
– पार्षदों के रिश्तेदारों के टेंडर पर उठा विवाद
– नींबू-मिर्च टोटका चर्चा का केंद्र
– नालों के चैनलाइजेशन पर मिली जानकारी
समाधान की बजाय जांच के वादे
नगर निगम सम्मेलन में भले ही कई अहम मुद्दों पर बहस हुई, लेकिन अधिकतर मामलों में समाधान की बजाय जांच के आश्वासन मिले। जनता के गंदे पानी से लेकर राजनीतिक लाभ उठाने के आरोपों तक, हर मोर्चे पर सवाल खड़े हुए। अब देखना यह होगा कि इन चर्चाओं का धरातल पर कितना असर दिखता है।

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