बुरहानपुर। जिले के केला उत्पादक किसानों पर प्राकृतिक आपदा ने एक बार फिर कहर बरपा दिया। रविवार सुबह चली तेज हवा और आंधी ने शाहपुर क्षेत्र के कई गांवों में खड़ी केला फसल को जमीन पर गिरा दिया। बक्खारी, चापोरा, कोदरी, खामनी, धामनगांव, दापोरा सहित छह से अधिक गांवों में अधिकांश खेतों की फसल प्रभावित हुई है। कई किसानों की महीनों की मेहनत और लाखों रुपए की लागत देखते ही देखते बर्बाद हो गई।
चिंता की बात यह है कि जिले में सात दिन के भीतर केला फसल पर प्राकृतिक आपदा की यह दूसरी मार है। इससे पहले 24 मई को लोनी, हतनूर और नागुलखेड़ा क्षेत्र में तेज हवाओं से केला फसल को नुकसान पहुंचा था। उस नुकसान का सर्वे अभी पूरा भी नहीं हुआ था कि रविवार को शाहपुर क्षेत्र के किसानों पर फिर संकट टूट पड़ा।
सूचना मिलते ही पटवारी सर्वे के लिए रवाना
डिप्टी कलेक्टर एवं शाहपुर के प्रभारी तहसीलदार सृजन श्रीवास्तव ने बताया कि फसल नुकसान की सूचना मिलते ही पटवारियों को मौके पर सर्वे के लिए भेज दिया गया है। सर्वे रिपोर्ट आने के बाद ही वास्तविक नुकसान का आंकलन हो सकेगा। प्रशासन प्रभावित खेतों का निरीक्षण कर नुकसान की स्थिति दर्ज कर रहा है। इधर, 24 मई को लोनी, हतनूर और नागुलखेड़ा क्षेत्र में हुए नुकसान का सर्वे भी जारी है। बुरहानपुर तहसीलदार प्रवीण ओहरिया ने बताया कि प्रभावित गांवों में फसल क्षति का आकलन किया जा रहा है।
खेतों में तबाही का मंजर, किसानों के चेहरे पर चिंता
शाहपुर क्षेत्र के प्रभावित गांवों में खेतों का नजारा किसानों की परेशानी बयां कर रहा है। कई स्थानों पर पूरी कतारों में लगे केले के पौधे आंधी से गिर गए। किसानों का कहना है कि केला फसल तैयार करने में लंबा समय, भारी खर्च और लगातार देखरेख लगती है। खाद, मजदूरी, सिंचाई, दवा और रखरखाव पर बड़ी लागत आती है, लेकिन आंधी-तूफान कुछ ही मिनटों में पूरी मेहनत मिटा देता है।
किसानों के अनुसार हर साल प्राकृतिक आपदा से जिले में दो से तीन बार केला फसल को नुकसान होता है। इसके बाद भी उन्हें बीमा सुरक्षा नहीं मिलती। ऐसे में नुकसान की भरपाई करना किसानों के लिए मुश्किल हो जाता है।
बड़ा केला उत्पादक जिला, फिर भी बीमा से वंचित किसान
बुरहानपुर प्रदेश के प्रमुख केला उत्पादक जिलों में शामिल है। जिले को एक जिला-एक उत्पाद योजना में भी केला उत्पादन के लिए पहचान मिली हुई है। इसके बावजूद केला फसल पर किसानों को नियमित बीमा का लाभ नहीं मिल पा रहा है। किसानों का कहना है कि वर्ष 2018-19 में केवल एक बार केला फसल पर बीमा का लाभ मिला था। इसके अगले वर्ष जब किसानों ने बैंकों में प्रीमियम जमा किया, तो यह कहकर वापस कर दिया गया कि केंद्र सरकार से नोटिफिकेशन जारी नहीं हुआ है। तब से किसान बीमा योजना लागू होने का इंतजार कर रहे हैं।
संसद और विधानसभा में मुद्दा उठा, समाधान अब भी अधूरा
केला फसल बीमा का मुद्दा कई बार जनप्रतिनिधियों द्वारा उठाया जा चुका है। सांसद ज्ञानेश्वर पाटील ने संसद में इस विषय को रखा, वहीं नेपानगर विधायक मंजू राजेंद्र दादू ने विधानसभा में किसानों की मांग उठाई। एक बार समिति बनाने की बात भी सामने आई थी। कुछ माह पहले खकनार क्षेत्र के किसान ने भी आंदोलन कर केला फसल बीमा लागू करने की मांग की थी, लेकिन किसानों को अब तक ठोस राहत नहीं मिल सकी। किसानों का कहना है कि जब जिले की पहचान ही केला उत्पादन से है, तो इस फसल को मौसम आधारित फल बीमा योजना से बाहर रखना उनके साथ अन्याय है।
अरुण यादव बोले- अब आश्वासन नहीं, तत्काल मुआवजा चाहिए
फसल नुकसान के बाद पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा कि बुरहानपुर जिले के गांवों में आंधी-तूफान से किसानों की केला फसल तबाह हो गई है। सरकार की ओर से लगातार किसानों को केवल आश्वासन मिल रहा है। अब आश्वासन नहीं, तत्काल सर्वे और पर्याप्त मुआवजा मिलना चाहिए। उन्होंने मांग की कि केला फसल को मौसम आधारित फल बीमा योजना में शामिल किया जाए, ताकि बार-बार प्राकृतिक आपदा झेल रहे किसानों को आर्थिक सुरक्षा मिल सके।
किसानों की निगाहें अब सर्वे और राहत पर
लगातार हो रही फसल क्षति से किसान आर्थिक संकट में हैं। रविवार की आंधी ने शाहपुर क्षेत्र के किसानों की चिंता और बढ़ा दी है। अब प्रभावित किसान सर्वे रिपोर्ट, मुआवजे और लंबे समय से लंबित केला फसल बीमा योजना पर उम्मीद लगाए बैठे हैं।
प्रशिक्षण वर्ग से सीधे खेतों में पहुंचीं अर्चना चिटनिस, केला फसल नुकसान का लिया जायजा
आंधी-तूफान से प्रभावित गांवों का दौरा कर किसानों से की चर्चा, अधिकारियों को तत्काल सर्वे और वास्तविक नुकसान का आकलन करने के निर्देश
बुरहानपुर। जिले में शनिवार-रविवार की मध्यरात्रि आए तेज आंधी-तूफान ने केला उत्पादक किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। शाहपुर क्षेत्र के धामनगांव, बख्खारी, रायगांव, खामनी, नीमगांव, मैथा, खारी, फोफनार, मोहद सहित अनेक गांवों में हजारों एकड़ क्षेत्र में खड़ी केला फसल प्रभावित हुई है। कई खेतों में पौधे पूरी तरह धराशायी हो गए, जबकि कई स्थानों पर खड़े दिखाई दे रहे पौधों की उत्पादन क्षमता भी प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
फसल नुकसान की सूचना मिलते ही विधायक एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री अर्चना चिटनिस ने भाजपा के जिला प्रशिक्षण वर्ग के कार्यक्रमों के बीच से समय निकालकर रविवार सुबह प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। उन्होंने खेतों में पहुंचकर किसानों से चर्चा की और नुकसान का प्रत्यक्ष निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान चिटनिस ने कहा कि किसान अपनी पूरी पूंजी, मेहनत और उम्मीदें फसल में लगाता है, लेकिन प्राकृतिक आपदाएं उसकी आर्थिक स्थिति को गहरा झटका देती हैं। ऐसे समय में प्रशासन और जनप्रतिनिधियों का दायित्व है कि वे किसानों के साथ खड़े होकर राहत दिलाने के लिए संवेदनशीलता के साथ कार्य करें। उन्होंने राजस्व, कृषि एवं उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों को तत्काल सर्वे शुरू करने के निर्देश देते हुए कहा कि नुकसान का आकलन केवल गिरे हुए पौधों के आधार पर नहीं, बल्कि वास्तविक क्षति के आधार पर किया जाए। कई बार केले के पौधे बाहर से सुरक्षित दिखाई देते हैं, लेकिन तेज हवाओं के कारण उनकी उत्पादन क्षमता समाप्त हो जाती है।
चिटनिस ने अधिकारियों से कहा कि जहां 50 प्रतिशत से अधिक नुकसान हुआ है, वहां नियमानुसार राहत और क्षतिपूर्ति की प्रक्रिया तेजी से पूरी की जाए। उन्होंने कलेक्टर एवं वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा कर संयुक्त सर्वे दलों को प्रभावित क्षेत्रों में भेजने और जल्द रिपोर्ट शासन को भेजने का आग्रह भी किया।उन्होंने किसानों को भरोसा दिलाया कि नुकसान की भरपाई और उचित मुआवजा दिलाने के लिए शासन स्तर पर हरसंभव प्रयास किए जाएंगे तथा उपलब्ध सभी राहत प्रावधानों के तहत सहायता सुनिश्चित कराई जाएगी।