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10 हजार हेक्टेयर में केला फसल तबाह, किसानों ने केंद्र से मांगा 1000 करोड़ का पैकेज 

किसानों ने कहा- आरबीसी का मुआवजा नाकाफी, केंद्रीय दल बुरहानपुर आकर करे सर्वे; राहत नहीं मिली तो किसान, मजदूर और व्यापार सभी होंगे प्रभावित

बुरहानपुर। जिले में आंधी-तूफान और प्री-मानसून बारिश ने केला किसानों की कमर तोड़ दी है। खेतों में तैयार खड़ी फसल जमीन पर बिछ गई। कई किसानों की महीनों की मेहनत कुछ ही मिनटों में तबाह हो गई। प्रशासन स्तर पर सर्वे जरूर शुरू हो गया है, लेकिन किसानों का साफ कहना है कि आरबीसी के तहत मिलने वाला मुआवजा इस बड़े नुकसान की भरपाई नहीं कर सकता। अब किसानों ने केंद्र सरकार से कम से कम 1000 करोड़ रुपए के विशेष आर्थिक पैकेज की मांग उठाई है।

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आंधी-तूफान से 10 हजार हेक्टेयर से अधिक केला फसल प्रभावित होने का दावा

प्रभारी मंत्री तुलसी सिलावट के निर्देश और कलेक्टर हर्ष सिंह के मार्गदर्शन में प्रभावित क्षेत्रों में फसल नुकसान का सर्वे किया जा रहा है। सर्वे पूरा होने के बाद किसानों को आरबीसी के तहत राहत राशि मिलने की उम्मीद है, लेकिन किसानों का कहना है कि केला फसल में प्रति एकड़ लागत बहुत अधिक होती है। ऐसे में नाममात्र का मुआवजा उन्हें कर्ज और नुकसान से बाहर नहीं निकाल पाएगा।

किसानों ने कहा- विशेष पैकेज ही देगा संजीवनी

लोनी के किसान भास्कर महाजन, सुनील महाजन, राजेंद्र महाजन सहित महिला कांग्रेस अध्यक्ष आरती लांडे ने केंद्रीय कृषि मंत्री से बुरहानपुर के केला उत्पादक किसानों के लिए विशेष राहत पैकेज जारी करने की मांग की है। किसानों का कहना है कि इस बार नुकसान सामान्य नहीं, बल्कि व्यापक और विनाशकारी है। कई किसानों के पास अगली फसल लगाने के लिए भी पूंजी नहीं बची है किसानों ने बताया कि बुरहानपुर जिले में करीब 26 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में केला फसल का उत्पादन होता है। आंधी-तूफान और बारिश से इसमें से 10 हजार हेक्टेयर से अधिक फसल प्रभावित होने का अनुमान है। खेतों में गिरे पौधे, टूटी फसल और बर्बाद बागान किसानों की बदहाली की तस्वीर पेश कर रहे हैं।

केंद्रीय दल से सर्वे कराने की मांग

किसानों ने मांग की है कि केंद्रीय कृषि मंत्रालय का दल बुरहानपुर आए और प्रभावित खेतों का वास्तविक सर्वे करे। इसके बाद केंद्र सरकार किसानों के लिए विशेष पैकेज घोषित करे। किसानों का कहना है कि जिला केला उत्पादन का बड़ा केंद्र है। यदि इस संकट में किसानों को पर्याप्त राहत नहीं मिली तो इसका असर पूरे जिले की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। केला उत्पादन से जुड़े किसान ही नहीं, बल्कि व्यापारी, मजदूर, हम्माल, ट्रांसपोर्टर और मंडी से जुड़े लोग भी इस संकट की चपेट में आ सकते हैं। किसानों ने चेताया कि यदि राहत नहीं मिली तो रोजगार संकट बढ़ेगा और मजदूर वर्ग को पलायन के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।

8 साल से फसल बीमा का लाभ नहीं

किसानों की नाराजगी का बड़ा कारण फसल बीमा भी है। उनका कहना है कि केला उत्पादक किसान पिछले आठ साल से फसल बीमा के लाभ से वंचित हैं। प्राकृतिक आपदा के समय बीमा सुरक्षा कवच बन सकता था, लेकिन योजना का लाभ नहीं मिलने से हर बार किसान सीधे नुकसान झेलने को मजबूर हैं। किसानों ने कहा कि सरकार को बुरहानपुर की केला फसल की वास्तविक लागत, उत्पादन और नुकसान को ध्यान में रखते हुए राहत नीति बनानी चाहिए। केवल आरबीसी मुआवजा देकर किसानों को भरोसा नहीं दिया जा सकता। अब जरूरत है कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर बुरहानपुर के केला किसानों के लिए ठोस आर्थिक राहत घोषित करें।

इधर….

आंधी-तूफान से तबाह फसलों का मुद्दा भोपाल पहुंचा, अर्चना चिटनिस ने मुख्यमंत्री से मिलकर किसानों के लिए मांगी त्वरित राहत

बुरहानपुर। जिले में हाल ही में आए आंधी-तूफान और बारिश से किसानों को हुए भारी नुकसान का मामला अब मुख्यमंत्री स्तर तक पहुंच गया है। विधायक एवं पूर्व मंत्री अर्चना चिटनिस ने भोपाल में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात कर बुरहानपुर के किसानों की वास्तविक स्थिति से अवगत कराया और प्रभावित किसानों को शीघ्र राहत उपलब्ध कराने की मांग की।

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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से चर्चा करते हुए विधायक अर्चना चिटनीस

चिटनिस ने मुख्यमंत्री को बताया कि जिले के कई गांवों में तेज आंधी और बारिश के कारण विशेष रूप से केले की फसल को व्यापक नुकसान हुआ है। हजारों पौधे खेतों में गिर गए हैं, जिससे किसानों को लाखों रुपए की आर्थिक क्षति उठानी पड़ी है। उन्होंने कहा कि यह नुकसान केवल फसल का नहीं, बल्कि किसानों की मेहनत, उम्मीदों और आजीविका पर सीधा आघात है।

खेतों तक पहुंचीं, किसानों की सुनी पीड़ा

आपदा के बाद अर्चना चिटनिस लगातार प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर रही हैं। उन्होंने गांव-गांव पहुंचकर नुकसानग्रस्त खेतों का निरीक्षण किया, किसानों से संवाद किया और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ वास्तविक स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों को सर्वे कार्य गंभीरता, संवेदनशीलता और पारदर्शिता के साथ पूरा करने के निर्देश भी दिए। मुख्यमंत्री से चर्चा के दौरान उन्होंने आरबीसी 6-4 के तहत प्रभावित किसानों के प्रकरण शीघ्र तैयार कर राहत एवं मुआवजा वितरण प्रक्रिया में तेजी लाने का आग्रह किया। उनका कहना था कि वर्तमान परिस्थितियों में किसानों को तत्काल आर्थिक सहायता की आवश्यकता है, ताकि वे इस संकट से उबर सकें।

फसल बीमा योजना पर भी जोर

मुख्यमंत्री से मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के क्रियान्वयन पर भी चर्चा हुई। अर्चना चिटनिस ने योजना से संबंधित प्रक्रियाओं में तेजी लाने और प्राकृतिक आपदा से प्रभावित किसानों को अधिकतम लाभ दिलाने की मांग रखी। उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में फसल बीमा किसानों के लिए महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच साबित हो सकता है। उन्होंने मुख्यमंत्री को बताया कि प्रशासन द्वारा सर्वे कार्य लगातार जारी है और वे स्वयं इसकी नियमित मॉनिटरिंग कर रही हैं। किसानों से उनका निरंतर संवाद बना हुआ है तथा उनकी समस्याएं लगातार शासन स्तर तक पहुंचाई जा रही हैं।

राहत में कोई पात्र किसान न छूटे

अर्चना चिटनिस ने विश्वास जताया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव किसानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए शीघ्र आवश्यक निर्णय लेंगे। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदा की इस कठिन घड़ी में वे किसानों के साथ मजबूती से खड़ी हैं और यह सुनिश्चित करेंगी कि राहत, मुआवजा और सहायता से कोई भी पात्र किसान वंचित न रहे।

ये भी पढ़े- किसानों के दर्द के बीच खेतों में उतरे प्रभारी मंत्री, बोले- न कोई गांव छूटेगा, न कोई किसान

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