बुरहानपुर। सामाजिक सेवा की पहचान रही भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी अब ‘राजनीति का अखाड़ा’ बन चुकी है। 12 साल बाद पहली बार रेडक्रॉस प्रबंध समिति के चुनाव में ऐसी हलचल दिख रही है, जैसे विधानसभा चुनाव हो। गुरुवार को नामांकन की अंतिम तिथि पर 21 पदों के लिए 61 उम्मीदवारों ने फार्म भरे, जिसमें शहर के लगभग सभी प्रमुख राजनीतिक गुटों की मौजूदगी दर्ज हुई। जिला कलेक्टर कार्यालय स्थित नामांकन केंद्र गुरुवार को चुनावी रंग में रंगा नजर आया। हर गुट के समर्थक अपनी ताकत दिखाने में जुटे थे।
सांसद बनाम विधायक गुट की सीधी टक्कर
सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल और विधायक अर्चना चिटनीस के गुट इस चुनाव में खासे सक्रिय नजर आ रहे हैं। वहीं, कांग्रेस से ठाकुर गुट, अजय रघुवंशी गुट सहित कांग्रेस पदाधिकारी भी चुनावी मैदान में हैं। यानी रेडक्रॉस के इस चुनाव में सत्ता पक्ष और विपक्ष की सीधी भिड़ंत तय है। दरअसल यह चुनाव अब सेवा भावना से ज़्यादा शक्ति प्रदर्शन का मंच बन गया है।
21 पद, 61 दावेदार, 413 वोटर – इसलिए खास है यह चुनाव
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| प्रबंध समिति पद | 21 सदस्य |
| नामांकन प्राप्त | 61 फार्म |
| रेडक्रॉस सदस्य | 413 कुल वोटर |
| नाम वापसी की तिथि | शुक्रवार (11 AM से 5 PM तक) |
| मतदान की संभावना | अगर 21 से अधिक नाम शेष रहते हैं |
2013 में 62 नामांकन आए थे, लेकिन इस बार गुटबाजी ने रिकॉर्ड तोड़ दिया। यदि कोई नामांकन वापस नहीं हुआ, तो सीधी वोटिंग के आसार बन रहे हैं।
प्रशासन की तैयारी: ‘गुटबाजी’ के बावजूद पारदर्शिता की बात
अपर कलेक्टर वीरसिंह चौहान ने बताया कि चुनाव प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता के साथ होगी। अगर प्रत्याशी 21 से अधिक रहे, तो मतदान की तिथि तय की जाएगी। किसी भी तरह की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
वरिष्ठ सदस्य बोले – पहले सेवा होती थी, अब सत्ता की होड़ है
रेडक्रॉस के पुराने सदस्य नाम नहीं छापने की शर्त पर बोले – पहले जोश होता था सेवा का, अब जोश है ‘संचालक’ कहलाने का। जब से रेडक्रॉस में चुनावी प्रक्रिया आई है, कुछ लोग इसे अपनी राजनीति की सीढ़ी बना रहे हैं।
रेडक्रॉस का ढांचा क्या है?
• अध्यक्ष – जिला कलेक्टर (पदेन)
• सचिव – प्रशासनिक अधिकारी
• प्रबंध समिति – 21 निर्वाचित सदस्य जिन्हें ‘संचालक’ भी कहा जाता है
• कार्यकाल – 3 वर्ष, परंतु 12 साल बाद हो रहा चुनाव