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वोट चोरी से शुरू, अब निकाय में लोकतंत्र की हत्या तक – अरुण यादव का भाजपा पर हमला

धारा 43 (क) और 43 (ए) में बदलाव को ‘जनता की आवाज़ दबाने की चाल’ बताया

On: August 11, 2025 4:32 PM
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अरुण यादव भाजपा सरकार निकाय लोकतंत्र पर हमला
  • सड़क से कोर्ट तक संघर्ष का ऐलान

भोपाल। पूर्व केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री और मप्र कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अरुण यादव ने सोमवार को भोपाल में प्रेस वार्ता कर केंद्र और राज्य की भाजपा सरकार पर लोकतंत्र की नींव हिलाने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा— केंद्र की मोदी सरकार ने विधानसभा और लोकसभा चुनावों में वोट चोरी कर लोकतंत्र को कमजोर किया, और अब डॉ. मोहन यादव की प्रदेश सरकार नगर पालिका अधिनियम 1961 में संशोधन कर निकाय स्तर पर भी लोकतंत्र की हत्या करने जा रही है।
धारा 43 (क) और 43 (ए) – लोकतंत्र का ‘सुरक्षा कवच’
यादव ने स्पष्ट कहा कि धारा 43 (क) और 43 (ए) निर्वाचित पार्षदों को महापौर और अध्यक्ष की तानाशाही के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने का अधिकार देती हैं। ये धाराएं लोकतंत्र का सुरक्षा कवच हैं, लेकिन भाजपा बार-बार संशोधन कर इस कवच को कमजोर कर रही है।
तथ्यों के साथ आरोप – “सीधा लोकतंत्र पर प्रहार”
1. पहला वार – पिछले साल धारा 43 (क) में संशोधन कर अविश्वास प्रस्ताव की न्यूनतम अवधि 6 महीने से बढ़ाकर 1 साल कर दी गई।
2. दूसरा वार – अब इसे साढ़े चार साल करने का प्रस्ताव है, यानी पूरे कार्यकाल में जनता की नाराजगी का असर खत्म।
3. जवाबदेही पर चोट – धारा 43 (ए) में अविश्वास पारित होने के बाद केवल 6 माह का कार्यकाल देने का प्रावधान – जवाबदेही का मजाक।
4. राजनीतिक मंशा – यह सब भाजपा के भीतर के असंतोष और जनता के गुस्से को दबाने की रणनीति है।
भाजपा के अपने पार्षद भी नाराज
अरुण यादव ने दावा किया कि प्रदेश के 16 नगर निगम, 98 नगरपालिका और 264 नगर परिषदों में 80% महापौर व अध्यक्ष भाजपा या उसके समर्थित हैं। इनकी कार्यशैली से कांग्रेस ही नहीं, भाजपा के निर्वाचित पार्षद भी असंतुष्ट हैं। नगरीय प्रशासन और आवास विभाग की योजनाओं में खुलेआम भ्रष्टाचार हो रहा है।
जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर खतरा
अरुण यादव ने कहा— पार्षद लोकतंत्र का सबसे अहम हिस्सा हैं। वे सीधे जनता से चुने जाते हैं और जमीनी स्तर पर जवाबदेही तय करते हैं। धारा 43 (क) और 43 (ए) पर हमला, जनता की आवाज़ पर हमला है। यह सिर्फ अधिकार छीना जाना नहीं, बल्कि लोकतंत्र की हत्या है।
संघर्ष का ऐलान – कोर्ट और सड़क दोनों पर लड़ाई
यादव ने चेतावनी दी— प्रदेशभर के पार्षदों का वृहद सम्मेलन बुलाया जाएगा। आवश्यकता पड़ी तो हाई कोर्ट में याचिका दायर की जाएगी। जनता और चुने हुए प्रतिनिधियों के अधिकार बचाने के लिए सड़क पर आंदोलन किया जाएगा।
मुख्य बातें
• केंद्र पर विधानसभा और लोकसभा चुनाव में वोट चोरी का आरोप
• निकाय चुनाव में धारा 43 (क) की समयसीमा 6 माह से बढ़ाकर पहले 1 साल, अब 4.5 साल प्रस्तावित
• अविश्वास के बाद महज 6 माह का कार्यकाल – “जवाबदेही खत्म”
• भाजपा के भीतर भी असंतोष, भ्रष्टाचार के आरोप
• कोर्ट और सड़क पर संघर्ष का ऐलान

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