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नवलसिंह शक्कर कारखाना में ‘लक्ज़री खेल’! मंत्री ने सदन में मानी गड़बड़ी, बोले– शिकायतों से ज्यादा निकले प्रकरण

विधानसभा में गूंजा शक्कर कारखाना मामला, कार्रवाई के संकेत

बुरहानपुर। घाटे में डूबे झिरी स्थित नवलसिंह सहकारी शक्कर कारखाना में ‘लक्ज़री खेल’ का मामला अब खुलकर सामने आ गया है। मध्यप्रदेश विधानसभा में खुद सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग ने स्वीकार किया कि कारखाने में अनियमितताएं हुई हैं। इतना ही नहीं, मंत्री ने कहा कि जितनी शिकायतें आई थीं, उससे

सदन में यह खुलासा होते ही बुरहानपुर की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। अब सवाल उठ रहा है—घाटे में चल रहे कारखाने में आखिर किसके इशारे पर लक्ज़री वाहन खरीदा गया और उसका इस्तेमाल किन-किन ने किया?

विधायक का सवाल, सदन में खुला मामला

बुरहानपुर विधायक अर्चना चिटनिस ने इस मामले को लेकर विधानसभा में प्रश्न लगाया था। वे सदन में मौजूद नहीं थीं, इसलिए उनके अधिकृत प्रतिनिधि के रूप में खातेगांव विधायक आशीष शर्मा ने सवाल उठाया। उन्होंने कहाकारखाना पहले से घाटे में था। वित्त विभाग ने साफ निर्देश दिए थे कि कोई लक्ज़री वाहन नहीं खरीदा जाएगा। इसके बावजूद संचालक मंडल ने बिना सक्षम स्वीकृति वाहन खरीदा। वाहन का उपयोग अध्यक्ष के अलावा अन्य लोगों ने भी किया। आज तक लॉगबुक उपलब्ध नहीं है। कई टोल नाकों पर वाहन की एंट्री दर्ज मिली है। संचालक मंडल भंग होने के बाद भी खरीदी जारी रही। सदन में यह भी मांग उठी कि भोपाल से विशेष टीम भेजकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए।

जांच में क्या निकला?

मंत्री विश्वास सारंग ने जवाब में बताया कि इंदौर और उज्जैन के डिप्टी रजिस्ट्रार (डीआर) की संयुक्त समिति से जांच कराई गई। जांच प्रतिवेदन में साफ तौर पर गड़बड़ी की पुष्टि हुई है। मंत्री ने कहा शिकायतों से ज्यादा प्रकरण सामने आए हैं। दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह बयान साफ संकेत दे रहा है कि आने वाले दिनों में जिम्मेदारों पर बड़ी कार्रवाई हो सकती है।

घाटे में कारखाना, फिर भी ‘लक्ज़री’ प्राथमिकता?

स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि जब कारखाना आर्थिक संकट से जूझ रहा था, तब प्राथमिकता उत्पादन और भुगतान व्यवस्था को मजबूत करने की होनी चाहिए थी। लेकिन इसके उलट लक्ज़री वाहन खरीदी और कथित दुरुपयोग ने सहकारी व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सहकारी संस्थाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर यह मामला एक बड़ी मिसाल बन सकता है।

अब निगाह कार्रवाई पर

जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद अब प्रशासनिक कार्रवाई की तैयारी मानी जा रही है। क्या संचालक मंडल के जिम्मेदारों पर एफआईआर होगी? क्या वित्तीय अनियमितताओं की रिकवरी की जाएगी? क्या वाहन खरीदी और उपयोग से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक होंगे? इन सवालों के जवाब आने बाकी हैं। फिलहाल मंत्री के बयान ने यह साफ कर दिया है कि मामला हल्का नहीं है।

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